window.dataLayer = window.dataLayer || []; function gtag(){dataLayer.push(arguments);} gtag('js', new Date()); gtag('config', 'G-VQJRB3319M'); शारदीय चैत्र नवरात्रि पर्व के दशहरे पर सीधी हो जाती है मां काली कंकाली की टेढ़ी गर्दन दर्शन के लिए उमड़ता है देवी भक्तों का सैलाब - MPCG News

शारदीय चैत्र नवरात्रि पर्व के दशहरे पर सीधी हो जाती है मां काली कंकाली की टेढ़ी गर्दन दर्शन के लिए उमड़ता है देवी भक्तों का सैलाब

शारदीय चैत्र नवरात्रि पर्व के दशहरे पर सीधी हो जाती है मां काली कंकाली की टेढ़ी गर्दन दर्शन के लिए उमड़ता है देवी भक्तों का सैलाब
*दैनिक प्राईम संदेश जिला ब्यूरो चीफ राजू बैरागी जिला *रायसेन*

रायसेन।रायसेन जिले में स्थित ओबेदुल्लागंज ब्लॉक के गुदावल स्थित मां काली कंकाली का मंदिर आज से लगभग 400 साल पुराना है।ऐसी मान्यता है कि शारदीय नवरात्रि पर्व के दौरान विजयादशमी पर कुछ पलों के लिए मां कंकाली की टेढ़ी गर्दन सीधी होती है।काली कंकाली देवी प्रतिमा की मूर्ति की तिरछी गर्दन190 डिग्री कोण झुकी हुई है।
इस नवरात्रि जरूर करें मां कंकाली के दर्शन…
शारदीय नवरात्र पर्व की धूम मां काली कंकाली देवी मंदिर परिसर में दर्शन पूजन के लिए जनसैलाब उमड़ने लगा है। शारदीय नवरात्रि की चकाचौंध मंदिरों में देखते ही बन रही है।भोपाल विदिशा सीहोर सहित आसपास के और दूरदराज क्षेत्रों से सैलाब पूरे नौ तक उमड़ेगा। आम दिनों के मुकाबले नवरात्र के त्योहार के समय भक्तों की भारी भीड़ दर्शन के लिए उमड़ती है। एमपी में देवी मां कंकाली और देवी मैय्या के कई मंदिर है जो अपने चमत्कारों के चलते दुनिया भर में लोकप्रिय है। भोपाल से लगभग 22 किलोमीटर दूर मां काली कंकाली के दर पर आए भक्त कभी खाली हाथ नहीं लौटते।मां काली कंकाली देवी भक्तों की हर मुरादें पूरी करती हैं। नवरात्रि के समय विदेशों से श्रद्धालु यहां अपनी मन्नतें लेकर आते है। मान्यता है कि माता की टेढ़ी गर्दन नवरात्रि दशहरे पर सीधी हो जाती है।
वैसे तो मध्यप्रदेश के कई चमत्कारी देवी माता के मंदिर।लेकिन रायसेन जिले के गुदावल स्थित मां काली कंकाली मन्दिर यहां हर मनोकामना होती है पूरी, नवरात्रि में उमड़ती है भक्तों की भीड़।एक बार माता काली के परम भक्त महंत को यह स्वप्न दिया कि जहाँ आप गहरी नींद में सो रहा जमीन में काली देवी की मूर्ति गड़ी है उसकी खुदाई कराएं।भूमि की जब खुदाई की तो माता काली कंकाली की की उस मूर्ति को मठ में स्थापित पूरे विधान से कराई।मन्दिर की आस्था ख्याति दूरदराज इलाकों में फैल गई।मन्दिर समिति से जुड़े देवी काली कंकाली गुदावल के चरणसेवक समाजसेवी मनोहर मेहर ने बताया कि बाबा ब्रजमोहन दास की भक्ति तपस्या से खुश होकर उन्हें दर्शन देकर अंतर्ध्यान हो गई थी।बाबा ब्रजमोहन दास ने बरसों वीरान जंगल में जप तप कर मां कंकाली देवी की पूजन आरती की।मन्दिर समिति के अध्यक्ष गुलाब सिंह मीणा वर्ष 1970 में चोर प्रतिमा सहित अन्य सामग्री चुराकर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सौदा कर दिया था।फिर माता काली कंकाली ने चमत्कार दिखाया।वह चोर पकड़े गए।कंकाली माई के श्राप से चोरों की आंखों की रोशनी चली गई थी।बाद में वापस मूर्ति की उसी मन्दिर में प्राण प्रतिष्ठा कर दी गई थी।
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