window.dataLayer = window.dataLayer || []; function gtag(){dataLayer.push(arguments);} gtag('js', new Date()); gtag('config', 'G-VQJRB3319M'); बाकुड़ पंचायत में 14 हजार का रिचार्ज बिल में खर्च- आखिर किसके लिए ? - MPCG News

बाकुड़ पंचायत में 14 हजार का रिचार्ज बिल में खर्च- आखिर किसके लिए ?

कागजों में निर्माण, खातों में भुगतान, पंचायत पर बड़ा सवाल ?

जीत आम्रवंशी

बैतूल/घोड़ाडोंगरी। जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत बाकुड़ एक बार फिर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार को लेकर सुर्खियों में है। घोड़ाडोंगरी जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली यह पंचायत पिछले दो वर्षों से विकास कार्यों के बजाय घोटालों के आरोपों से घिरी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां सरकारी योजनाओं के नाम पर आने वाली राशि का खुलेआम बंदरबांट किया जा रहा है।

कागजों पर खड़ी आंगनबाड़ी, धरातल पर कुछ नहीं

पंचायत में इससे पहले भी आंगनबाड़ी भवन निर्माण के नाम पर लाखों रुपये खर्च दर्शाए गए। सरकारी दस्तावेजों में इमारत पूरी बनकर तैयार दिखाई गई, लेकिन जमीनी हकीकत में ऐसा कोई निर्माण नजर नहीं आता। ग्रामीणों का कहना है कि यह सीधा-सीधा सरकारी धन के गबन का मामला है।

हफ्ते में एक-दो दिन खुलने वाली पंचायत का 14 हजार रिचार्ज बिल

ताजा मामला मोबाइल रिचार्ज बिल को लेकर सामने आया है। पंचायत द्वारा 14 महीनों में 14,000 रुपये का इंटरनेट खर्च दर्शाया गया है। जिसमें 1000 प्रति माह के हिसाब से सरपंच भैयालाल बैठे के हस्ताक्षर द्वारा बिल निकाला गया है। जबकि स्थानीय लोगों के अनुसार पंचायत कार्यालय मुश्किल से हफ्ते में एक या दो दिन ही खुलता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बंद भवन में हर महीने लगभग 1000 रुपये का इंटरनेट कौन और किस काम के लिए उपयोग कर रहा था ?

आपको बता दे शासन से प्राप्त आदेश अनुसार इसी ग्राम पंचायत जहां पर इंटरनेट सुविधा नहीं हो तो उसी पंचायत के सहायक सचिव अपने मोबाइल में रिचार्ज कर पंचायत के कार्य आईडी के माध्यम से ऑनलाइन कार्य कर सकते है। इस रिचार्ज बिल को लेकर पड़ताल करने पर ग्रामीणों ने बताया कि पूरे गांव में नेटवर्क सुविधा उपलब्ध है और इससे पहले कभी पंचायत अधिकारियों को नेटवर्क या रिचार्ज की समस्या नहीं हुई तो फिर आदेश आने के बाद 1000 रुपए प्रति माह के हिसाब से 14 माह का 14000 का मोबाइल रिचार्ज बिल क्यों लगाया गया। इससे साफ प्रतीत होता है कि गांव के विकास कार्य में लगने वाला धन पंचायत के सरपंच और सचिव द्वारा निकाला जा रहा है।

स्टेशनरी के नाम पर फर्जी बिलों का खेल और आम जनता के हक पर डाका

सिर्फ इंटरनेट ही नहीं, बल्कि स्टेशनरी खरीदी के नाम पर भी कथित फर्जी बिल लगाए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि बिना वास्तविक खरीदी के कागजों में खर्च दिखाकर पंचायत का खजाना खाली किया जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि जो धन गांव की सड़क, पानी, स्वच्छता और अन्य मूलभूत सुविधाओं पर खर्च होना चाहिए था, वह कथित तौर पर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से हड़प लिया गया। यह मामला सिर्फ कुछ हजार रुपयों का नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।

इनका कहना है:—

(1) रिचार्ज के बिल में मेरे ही हस्ताक्षर है लेकिन मैने बिल नहीं देखा मुझसे हस्ताक्षर करवाया गया है।

भैयालाल बैठे, सरपंच ग्राम पंचायत बाकुड़

(2) ग्राम पंचायत के रोजगार सहायक सचिव को प्रावधान है कि वह रिचार्ज कर अपना ऑनलाइन कार्य कर सकते है, पंचायत की कार्य आईडी से लेकिन इतना ज्यादा अमाउंट का कौनसा रिचार्ज है में दिखवाता हु।

प्रपंज आर, शाहपुर एसडीएम

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