आउटसोर्स भर्ती प्रक्रिया, कथित फर्जी वेतन भुगतान और नौकरी के नाम पर वसूली के आरोप; 15 दिन में जवाब तलब, नहीं तो एकपक्षीय कार्रवाई की चेतावनी
बैतूल। मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में एक बड़ा प्रशासनिक विवाद सामने आया है। संचालनालय, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा द्वारा बैतूल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. मनोज कुमार हुरमड़े के विरुद्ध विस्तृत आरोपपत्र जारी किया गया है। आरोपपत्र में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती, वेतन भुगतान में कथित वित्तीय अनियमितता तथा भर्ती प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन सहित कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। विभाग ने आरोपों पर स्पष्टीकरण देने के लिए 15 दिनों का समय दिया है।
बिना पारदर्शी प्रक्रिया के आउटसोर्स भर्ती का आरोप
आरोपपत्र के अनुसार वर्ष 2024-25 में आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति शासन के निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं की गई। शासन के 5 जुलाई 2024 के आदेश में भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी निविदा (टेंडर) अथवा निर्धारित चयन प्रक्रिया के माध्यम से कराने के निर्देश दिए गए थे। आरोप है कि इन निर्देशों का पालन किए बिना एक एजेंसी को कार्यादेश जारी किया गया, जिससे भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए हैं।
वेतन भुगतान में गंभीर वित्तीय अनियमितता का आरोप
आरोपपत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिले में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों की वास्तविक संख्या और वेतन भुगतान के रिकॉर्ड में गंभीर अंतर पाया गया। आरोप है कि दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के दौरान वास्तविक संख्या से कहीं अधिक कर्मचारियों के नाम पर भुगतान किया गया, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका व्यक्त की गई है। इस मामले में लेखा शाखा की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
भर्ती में वसूली और रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के आरोप
आरोपपत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि नौकरी दिलाने के नाम पर उम्मीदवारों से धनराशि वसूले जाने तथा परिचितों एवं रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने जैसी शिकायतें सामने आई हैं। हालांकि इन आरोपों की विभागीय जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
15 दिन में जवाब देने का निर्देश
संचालनालय ने डॉ. हुरमड़े को आरोपपत्र प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर अपना लिखित जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्हें व्यक्तिगत सुनवाई और अपने पक्ष में साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर भी दिया गया है। यदि निर्धारित अवधि में जवाब प्रस्तुत नहीं किया जाता है तो विभागीय नियमों के अनुसार एकपक्षीय कार्रवाई की जा सकती है।
नियमों के उल्लंघन का आरोप
आरोपपत्र में मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 के विभिन्न उपबंधों के उल्लंघन का उल्लेख किया गया है। फिलहाल यह विभागीय कार्रवाई का मामला है और आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच एवं सुनवाई पूरी होने के बाद ही होगी।






