window.dataLayer = window.dataLayer || []; function gtag(){dataLayer.push(arguments);} gtag('js', new Date()); gtag('config', 'G-VQJRB3319M'); KBC विनर तहसीलदार पर करोड़ों का घोटाला, 127 फर्जी खातों में 2.57 करोड़ की हेराफेरी का आरोप - MPCG News

KBC विनर तहसीलदार पर करोड़ों का घोटाला, 127 फर्जी खातों में 2.57 करोड़ की हेराफेरी का आरोप

हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज की याचिका, कभी भी हो सकती है गिरफ्तारी

श्योपुर। कभी क्विज शो में तेज़ दिमाग और आत्मविश्वास के दम पर लाखों रुपये जीतकर सुर्खियों में आईं तहसीलदार अमिता सिंह तोमर अब गंभीर कानूनी संकट में घिर गई हैं। Kaun Banega Crorepati (KBC) में 50 लाख रुपये जीतने के बाद चर्चित हुईं यह अधिकारी अब श्योपुर के बहुचर्चित बाढ़ राहत घोटाले में गिरफ्तारी के कगार पर हैं।

सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका

गिरफ्तारी से बचने के लिए अमिता सिंह तोमर ने पहले ग्वालियर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली। इसके बाद मामला Supreme Court of India पहुंचा, जहां 17 मार्च को उनकी अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज कर दी गई। अब पुलिस किसी भी समय उनकी गिरफ्तारी कर सकती है।

क्या है पूरा मामला ?

यह मामला साल 2021 में श्योपुर जिले में आई बाढ़ के बाद राहत राशि वितरण से जुड़ा है। आरोप है कि बड़ौदा तहसील में उस समय पदस्थ तहसीलदार अमिता सिंह तोमर, करीब 25 पटवारियों और 100 से ज्यादा बिचौलियों के साथ मिलकर 127 फर्जी खातों में लगभग 2.57 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए।

जांच में बड़ा खुलासा

डिप्टी कलेक्टर की ऑडिट में यह गड़बड़ी सामने आई। आरोप है कि रिश्तेदारों और परिचितों को फर्जी तरीके से बाढ़ पीड़ित दिखाकर उनके खातों में सरकारी राशि डलवाई गई। इसके बाद बड़ौदा थाने में FIR दर्ज हुई और जांच में 100 से अधिक लोगों को आरोपी बनाया गया, जिनमें अमिता सिंह तोमर और कई पटवारी शामिल हैं।

गिरफ्तारी की उलटी गिनती शुरू

सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद अब पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, किसी भी समय गिरफ्तारी हो सकती है, जिससे राजस्व विभाग में हलचल मच गई है।

विवादों से पुराना नाता

अमिता सिंह तोमर का नाम पहले भी कई विवादों में आ चुका है। सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट, प्रशासनिक फैसलों पर सवाल और बार-बार तबादलों को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखे। साल 2023 में तहसील का प्रभार नहीं मिलने पर उन्होंने इस्तीफे की पेशकश भी की थी। कभी KBC की चमक, अब कानूनी संकट—अमिता सिंह तोमर की कहानी अब एक नए मोड़ पर खड़ी है, जहां जीत की जगह जवाबदेही का सामना करना पड़ रहा है।

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