WCL पाथाखेड़ा में 15 दिन से सुलग रहा मजदूर आंदोलन ने मचाई हलचल
भोपाल से पहुंचे केंद्रीय श्रम अधिकारी, सुरक्षा की मांग तेज
बैतूल/सारनी। वेस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) के पाथाखेड़ा क्षेत्र की कोयला खदानों में कार्यरत ठेका मजदूरों का अनिश्चितकालीन आंदोलन शुक्रवार को 15वें दिन भी जारी रहा। लगातार चल रहे आंदोलन ने प्रशासनिक और श्रम विभाग के अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। मजदूरों की समस्याओं को सुनने के लिए केंद्रीय श्रम विभाग भोपाल से लेबर इन्फॉर्मेशन ऑफिसर आशीष गुप्ता आंदोलन स्थल पहुंचे और मजदूरों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याओं और मांगों को गंभीरता से सुना।
अधिकारी ने मजदूरों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं को प्रबंधन अधिकारियों के समक्ष रखकर जल्द ही स्थिति स्पष्ट की जाएगी और उचित कार्रवाई की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
प्रशासन भी हुआ सक्रिय
आंदोलन के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए स्थानीय प्रशासन भी सक्रिय नजर आया। बीती रात मजदूरों द्वारा की गई शिकायत के आधार पर सारनी थाना प्रभारी के निर्देश पर पुलिस चौकी से हेड कांस्टेबल डहेरिया आंदोलन स्थल पहुंचे और मजदूरों के कथन दर्ज किए।
लगातार 15 दिनों से चल रहे इस आंदोलन ने शहर से लेकर प्रशासनिक विभागों तक हलचल मचा दी है। मजदूरों का आरोप है कि लंबे समय से ठेकेदारों की मनमानी और आर्थिक शोषण के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
समाजसेवी नेताओं को मिल रही धमकियां
आंदोलन के बीच कुछ चिंताजनक घटनाएं भी सामने आई हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे समाजसेवी प्रदीप नागले ने बताया कि आंदोलन को कमजोर करने के उद्देश्य से उन पर दो बार प्राणघातक हमला किया जा चुका है।
वहीं पत्रकार मनोज पवार को भी बुधवार देर रात आंदोलन स्थल पर एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा गाली-गलौज करते हुए आंदोलन खत्म करने की धमकी दी गई। इसके अलावा समाजसेवी नेता संतोष देशमुख के घर के बाहर भी देर रात अभद्र भाषा का प्रयोग किए जाने की घटना सामने आई है।
कलेक्टर-एसपी को दी लिखित शिकायत
इन घटनाओं को गंभीर बताते हुए आंदोलनकारियों ने जिला कलेक्टर और एसपी वीरेंद्र जैन को लिखित शिकायत सौंपकर सुरक्षा की मांग की है। मजदूरों का कहना है कि आंदोलन को दबाने के लिए डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन जब तक उनकी मांगों का समाधान नहीं होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
पाथाखेड़ा की कोयला खदानों में चल रहा यह आंदोलन अब केवल मजदूरों की मांगों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासन, श्रम विभाग और प्रबंधन के लिए भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।

