window.dataLayer = window.dataLayer || []; function gtag(){dataLayer.push(arguments);} gtag('js', new Date()); gtag('config', 'G-VQJRB3319M'); तमिलनाडु में फंसे बैतूल के श्रमिकों को बंधुआ मजदूरी से मिली आजादी, लौटते ही मिला प्रशासन का सहारा और 30 हजार की मदद - MPCG News

तमिलनाडु में फंसे बैतूल के श्रमिकों को बंधुआ मजदूरी से मिली आजादी, लौटते ही मिला प्रशासन का सहारा और 30 हजार की मदद

होली पर छुट्टी मांगी तो बना दिया बंधुआ

बैतूल प्रशासन ने तमिलनाडु से 20 श्रमिकों को कराया मुक्त

बैतूल। तमिलनाडु के इरोड जिले में बंधुआ बनाकर रखे गए बैतूल जिले के 20 श्रमिकों को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, जिला प्रशासन और वनवासी कल्याण आश्रम के संयुक्त प्रयासों से सफलतापूर्वक मुक्त कराया गया। सभी श्रमिकों के सुरक्षित बैतूल पहुंचने पर बैतूल रेलवे स्टेशन पर कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी और पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन ने उनका आत्मीय स्वागत किया।
इस दौरान वनवासी कल्याण आश्रम के जिला अध्यक्ष महेश्वर भलावी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमला जोशी, एसडीएम अभिजीत सिंह, जिला श्रम पदाधिकारी धम्मदीप भगत, थाना प्रभारी नीरज पाल सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

स्टेशन पर की गई पहचान, प्रशासन ने दिया भरोसा

रेलवे स्टेशन पर सभी श्रमिकों की पहचान सुनिश्चित की गई। कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने श्रमिकों से चर्चा करते हुए उन्हें भरोसा दिलाया कि प्रशासन उनकी पूरी मदद करेगा और सुरक्षित रूप से उनके गांव तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए राजस्व, पुलिस और श्रम विभाग लगातार उनके संपर्क में रहेंगे।
कलेक्टर ने श्रम पदाधिकारी को निर्देश दिए कि श्रमिकों से संपर्क बनाए रखते हुए आर्थिक सहायता स्वीकृत कराने के लिए आवश्यक दस्तावेज एकत्रित किए जाएं।

बस और भोजन की व्यवस्था कर घर भेजे गए श्रमिक

रेलवे स्टेशन से श्रमिकों को उनके गृह ग्राम तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए बसों की व्यवस्था की गई। इसके साथ ही भोजन की भी व्यवस्था की गई। सुरक्षित वापसी पर श्रमिकों ने जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया।

होली की छुट्टी मांगने पर बना दिया था बंधुआ

जिला श्रम पदाधिकारी धम्मदीप भगत ने बताया कि ये श्रमिक काम की तलाश में तमिलनाडु के इरोड जिले गए थे। वहां होली के अवसर पर अवकाश मांगने पर उन्हें छुट्टी नहीं दी गई और जबरन बंधुआ बनाकर काम कराया जा रहा था।
मामले की जानकारी राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य प्रकाश ऊईके को मिलने पर उन्होंने जिला प्रशासन को अवगत कराया। इसके बाद बैतूल प्रशासन ने श्रम, पुलिस और राजस्व विभाग के समन्वय से इरोड जिला प्रशासन से संपर्क कर सभी श्रमिकों को मुक्त कराया।

प्रत्येक श्रमिक को मिलेगी 30 हजार रुपये सहायता

रेस्क्यू किए गए प्रत्येक श्रमिक को शासन की ओर से 30-30 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी, ताकि वे अपने जीवन को फिर से व्यवस्थित कर सकें। जिला प्रशासन ने उनके पुनर्वास और आवश्यक सहयोग का भी आश्वासन दिया है।

बैतूल के 20 और हरदा के 4 श्रमिक

जानकारी के अनुसार कुल 24 श्रमिकों को मुक्त कराया गया, जिनमें से 4 हरदा जिले और 20 बैतूल जिले के निवासी हैं। बैतूल के सभी श्रमिक भीमपुर ब्लॉक के काबरा, बोरकुंड, बीरपुरा और बासिंदा गांव के रहने वाले हैं। हरदा जिले के चारों श्रमिकों को भी सुरक्षित उनके घर पहुंचाने की व्यवस्था की गई। इस पूरे अभियान में समाजसेवी प्रवीण ढोलके और विक्रांत कुमरे ने भी सक्रिय भूमिका निभाई।

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