window.dataLayer = window.dataLayer || []; function gtag(){dataLayer.push(arguments);} gtag('js', new Date()); gtag('config', 'G-VQJRB3319M'); डुलारा में 52 परियों की सज रही बड़ी महफिल, प्रशासन को दे रहे चकमा - MPCG News

डुलारा में 52 परियों की सज रही बड़ी महफिल, प्रशासन को दे रहे चकमा

तवा नदी के किनारे और जंगलों में लग रहा लाखों का दांव

घोड़ाडोंगरी। चोपना थाना क्षेत्र अंतर्गत दुलारा में एक बार फिर जुए की अवैध महफिलें आबाद होने लगी हैं। पुलिस की नाक के नीचे दुलारा की तवा नदी का किनारा, घने जंगल और खेत अब जुआरियों के लिए सबसे सुरक्षित और महफूज ठिकाना बन चुके हैं। यह कोई छोटा-मोटा फड़ नहीं है, बल्कि यहां हर दिन लाखों रुपयों का दांव लग रहा है और रसूखदारों की महफिलें सज रही हैं।

वीआईपी सुविधाओं से लैस है जुए का अड्डा

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस जुए के अड्डे पर खिलाड़ियों को पूरी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। यहां केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि पांढुरना, आमला, मुलताई, चिचोली, बैतूल, पाढर, शाहपुर और भंवरा जैसे क्षेत्रों से बड़े-बड़े किसान, रसूखदार पटेल और नामचीन खिलाड़ी अपनी किस्मत आजमाने पहुंच रहे हैं। जुआरियों के लिए यह फड़ हर उस सुख-सुविधा से लैस किया गया है, जिससे उन्हें कोई परेशानी न हो।

नया चेहरा आगे कर पुराने आका चला रहे सिंडिकेट

इस पूरे काले कारोबार के संचालन का तरीका बेहद शातिराना है। बताया जा रहा है कि मौके पर जुए के फड़ का संचालन दुलारा निवासी जैल सिंह कर रहा है, लेकिन असल में वह केवल एक मुखौटा है। इस भट्ठे के असली मास्टरमाइंड सारणी, घोड़ाडोंगरी, पाढर और बैतूल के वे कुख्यात सटोरिए और जुआरी हैं, जिनका नाम इस अवैध मार्केट में पहले भी कई बार उछल चुका है। पुलिस की रडार से बचने के लिए इन आकाओं ने जैल सिंह को नया चेहरा बनाकर आगे कर दिया है। क्षेत्र में इस बात की भी पुरजोर चर्चा है कि इस पूरे सिंडिकेट को घोड़ाडोंगरी के एक रसूखदार नेता पुत्र का खुला संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते यह अवैध कारोबार बेखौफ फल-फूल रहा है।

पुलिस के मुखबिर तंत्र को कर रहे फेल, बच निकलते हैं ‘बड़े मगरमच्छ’

जुआरियों का यह नेटवर्क इतना मजबूत और शातिर है कि वे पुलिस की कार्रवाई को भी धता बता रहे हैं। जब भी पुलिस दबिश की तैयारी करती है, तो इन जुआरियों के गुर्गे जानबूझकर पुलिस को भ्रामक और गलत लोकेशन की जानकारी दे देते हैं। नतीजा यह होता है कि पुलिस किसी अन्य स्थान पर चल रहे छोटे-मोटे फड़ पर छापा मारती है और वहां से चिल्लर जुआरियों को पकड़कर अपनी खानापूर्ति कर लेती है।

इन छोटे जुआरियों के पास से न तो कोई बड़ी रकम बरामद होती है और न ही कोई सुराग मिलता है। पुलिस इन पर केस दर्ज कर अपनी कार्रवाई पूरी मान लेती है, जबकि इस पूरी चालबाजी में फंसकर पुलिस के हाथों से असली और ‘बड़े जुआरी’ लाखों का दांव लगाकर सुरक्षित अपने खेल को जारी रखते हैं।

इनका कहना है -

दो-तीन दिन से दुलारा में जुआ चलने की जानकारी मिल रही थी सोमवार को पुलिस टीम द्वारा सर्चिंग की गई थी जहां पर छोटे-मोटे जुआरी मिले हैं। चार लोगों को पकड़ा था। जिसमें से एक नाबालिक था तीन लोगों पर जुआ एक्ट के अंतर्गत मामला पंजीबद किया गया है।

रवि शाक्य, थाना प्रभारी चोपना

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