window.dataLayer = window.dataLayer || []; function gtag(){dataLayer.push(arguments);} gtag('js', new Date()); gtag('config', 'G-VQJRB3319M'); संजीव त्रिपाठी मामले में लुट की कहानी या कहानी में लुट - MPCG News

संजीव त्रिपाठी मामले में लुट की कहानी या कहानी में लुट

सारणी पुलिस के प्रेस नोट में महिला का जिक्र क्यों नहीं ?

वायरल वीडियो में पुलिस को नहीं बुलाने की कथित मिन्नतें

क्या है वायरल वीडियो डिलीट करवाने की कहानी ?

जीत आम्रवंशी, 9165783412
बैतूल/सारणी। थाना क्षेत्र के ग्राम खैरवानी के पास तेंदूखेड़ा के समीप 14 अगस्त को हुई कथित लूट की वारदात अब नया मोड़ लेती दिखाई दे रही है। मामले में शिकायतकर्ता संजीव त्रिपाठी पिता ब्रजमोहन त्रिपाठी, उम्र 57 वर्ष, निवासी एनबी-72, एबी टाइप सारणी की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पुलिस ने 18 अगस्त को जारी प्रेस नोट में बताया था कि संजीव त्रिपाठी जुन्नारदेव से सारणी आ रहे थे और तेंदूखेड़ा के समीप मेन रोड पर पेशाब करने के लिए कार से नीचे उतरे थे। इसी दौरान बाइक से आए चार युवकों ने जान से मारने की धमकी देकर उनसे ऑनलाइन 50 हजार रुपये ट्रांसफर कराए तथा मोबाइल फोन और 4500 रुपये नकद लूटकर फरार हो गए।

लेकिन अब सामने आए वायरल वीडियो ने पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में रात के अंधेरे में एक कार खड़ी दिखाई दे रही है, जिस पर “MP GOV. MPPGCL SARNI” लिखा हुआ नजर आ रहा है। वीडियो में एक पुरुष और महिला दिखाई दे रहे हैं तथा मौके पर मौजूद युवक पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाते नजर आ रहे हैं। वायरल वीडियो में शिकायतकर्ता बताए जा रहे संजीव त्रिपाठी द्वारा युवकों से हाथ जोड़कर “प्लीज पुलिस को मत बुलाओ” कहने की बात सामने आ रही है। यही वीडियो अब लूट की शिकायत और मौके की कथित वास्तविक स्थिति के बीच अंतर को लेकर सबसे बड़ा सवाल बन गया है।

पुलिस के प्रेस नोट में महिला का जिक्र क्यों नहीं ?

इस पूरे मामले में पुलिस के 18 अगस्त को जारी प्रेस नोट को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। वायरल वीडियो में संजीव त्रिपाठी के साथ एक महिला की मौजूदगी दिखाई देने का दावा किया जा रहा है, लेकिन पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट में महिला की मौजूदगी का कोई उल्लेख नहीं किया गया। ऐसे में यह जांच का विषय बन गया है कि यदि महिला उसी घटनाक्रम के दौरान मौके पर मौजूद थी तो पुलिस की प्रारंभिक जांच में उसका जिक्र क्यों नहीं आया। क्या पुलिस को महिला की मौजूदगी की जानकारी नहीं थी और अगर हा तो फिर वीडियो में दिखाई दे रहे दृश्य सही साबित होंगे। फिर भी जांच के दौरान यह पहलू सामने आने के बावजूद प्रेस नोट में शामिल नहीं किया गया ? इस सवाल का जवाब भी अब दोबारा होने वाली जांच में सामने आना जरूरी है।

आरोपियों के परिजन – लूट नहीं, कुछ और था पूरा मामला

आरोपी पक्ष के परिवारों का आरोप है कि संजीव त्रिपाठी ने पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति पुलिस के सामने नहीं रखी और युवकों को लूट के मामले में फंसा दिया गया। परिवारों का दावा है कि वायरल वीडियो में घटनाक्रम की अलग तस्वीर दिखाई दे रही है और यदि वीडियो उसी रात की घटना से संबंधित है तो पुलिस में दर्ज शिकायत की कहानी की भी दोबारा जांच होना चाहिए। परिवारों ने यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस द्वारा आरोपियों को थाने ले जाने के बाद उनके मोबाइल से वीडियो डिलीट करवाया गया और वीडियो वायरल होने से रोकने का प्रयास किया गया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इनका सत्यापन पुलिस जांच का विषय है।

वायरल वीडियो ने बढ़ाई संजीव त्रिपाठी की मुश्किलें

वायरल वीडियो सामने आने के बाद शिकायतकर्ता संजीव त्रिपाठी की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। यदि वीडियो उसी घटनाक्रम का है, जिसकी शिकायत बाद में लूट के रूप में दर्ज कराई गई, तो युवकों से पुलिस को नहीं बुलाने की कथित मिन्नतों की वजह क्या थी, यह पुलिस के लिए जांच का महत्वपूर्ण बिंदु है। दूसरी ओर यदि वीडियो किसी अलग घटनाक्रम का है तो उसकी वास्तविकता, तारीख, स्थान और उसमें दिखाई दे रहे लोगों की पहचान भी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे में वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे दावों के बजाय पुलिस की निष्पक्ष जांच ही पूरे मामले की सच्चाई सामने ला सकती है।

शिकायत में किसे किया गुमराह, लूट की शिकायत भी जांच के घेरे में

MPPGCL से जुड़े अधिकारी संजीव त्रिपाठी की कार का जंगल क्षेत्र के समीप खड़ा होना और वायरल वीडियो में महिला की मौजूदगी का दावा सामने आने के बाद मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। आरोपी पक्ष का कहना है कि यदि मौके पर कोई दूसरा घटनाक्रम हुआ था तो उसी घटनाक्रम को बाद में लूट का रूप देकर युवकों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया। वहीं पुलिस की ओर से अब तक सामने आई कहानी में लूट की वारदात का उल्लेख है। ऐसे में दोनों पक्षों के दावों के बीच वास्तविकता क्या है, यह पता लगाने के लिए घटनास्थल, मोबाइल वीडियो, कॉल डिटेल, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, सीसीटीवी और घटनाक्रम से जुड़े सभी लोगों के बयान की निष्पक्ष जांच जरूरी हो जाती है।

नोट: अगले अंक में हम आपको दिखाएंगे कि किसने, किससे, कैसे और कहां डिलीट करवाई वायरल वीडियो ?

इनका कहना है -

आप मुझे वीडियो भेजिए, दोबारा निष्पक्ष जांच होगी, सारणी थाने पर मै कार्यवाही करूंगा।

वीरेंद्र जैन, पुलिस अधीक्षक बैतूल।

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