window.dataLayer = window.dataLayer || []; function gtag(){dataLayer.push(arguments);} gtag('js', new Date()); gtag('config', 'G-VQJRB3319M'); शिक्षक और छात्र-छात्राओं ने दी परम पूज्य विद्यासागर जी महाराज को भावपूर्ण श्रद्धांजलि - MPCG News

शिक्षक और छात्र-छात्राओं ने दी परम पूज्य विद्यासागर जी महाराज को भावपूर्ण श्रद्धांजलि

संवाददाता गौरव व्यास

गैरतगंज।

गैरतगंज तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम समनापुर मेंआज शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय समनापुर कलां में परम पूज्य आचार्य 108 श्री विद्या सागर जी महाराज के देह परिवर्तन होने पर सभी शिक्षकों एवं छात्रों द्वारा विनयांजलि समर्पित की गई जिसमें विद्यालय के प्राचार्य श्री संतोष मालवीय जी के द्वारा सभी शिक्षकों एवं छात्रों को उनके द्वारा की गई तप साधना एवं कार्यों तथा उनके स्वर्णिम जीवन के विषय मे बताया गया उपरोक्त कार्यक्रम में सभी शिक्षक उपस्थित रहे और आचार्य गुरुदेव के श्री चरणों मे अपनी अपनी अश्रुपूरित विनयांजलि अर्पित की।
प्राचार्य संतोष मालवीय ने परम पूज्य विद्यासागर जी महाराज जी के जीवन के बारे में छात्रों एवं शिक्षकों को जीवन के बारे में जानकारी दी
महान आचार्य पूज्य श्री विद्यासागर जी महाराज का शरीर डोंगरगढ़- राजनंदगांव (छत्तीसगढ़) में पूर्ण हो गया। पूज्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने 1968 में दिगंबरी दीक्षा ली थी और तब से आज तक वे निरंतर सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, अचौर्य, ब्रह्मचर्य की साधना करते हुए इन पंच महाव्रतों के देशव्यापी प्रचार हेतु समर्पित हो गए। लोक कल्याण की भावना से अनुप्राणित होकर पूज्य आचार्य श्री महाराज ने अपने जीवन में सैकड़ों मुनियों एवं आर्यिकाओं को दीक्षा प्रदान की और लोकोपकारी कार्यों हेतु सदैव अपनी प्रेरणा और आशीर्वाद प्रदान किया। संपूर्ण भारतवर्ष में उन्होंने अनेक स्थानों पर गौशालाएं, शिक्षा संस्थान, हथकरघा केंद्र तथा भिन्न-भिन्न प्रकार की लोकमंगलकारी योजनाओं का शुभारंभ कराया। अनेक कारागारों में वहां रह रहे हजारों लोगों के जीवन में आमूलचूल परिवर्तन करने का अभूतपूर्व कार्य आपके आशीर्वाद से ही चल रहा है। उनकी यही अभिलाषा थी कि यह देश अपनी उदात्त शिक्षाओं और जीवनादर्शों को लेकर पुनः खड़ा हो और वर्तमान समय में विश्व को नई दिशा प्रदान करे। उनका संपूर्ण जीवन इन आदर्शों के प्रति पूरी तरह समर्पित था। अंतिम श्वांस तक उन्होंने अपने कठोर साधनाव्रत का निर्वाह किया। लाखों लोग उन आदर्शों पर आज चल रहे हैं। उनके चले जाने का दु:ख तो सभी को होना स्वाभाविक ही है।
हम सभी लोग ईश्वर से प्रार्थना करते है कि उनके द्वारा दिग्दर्शित इस मार्ग पर हम सभी लोग और अधिक दृढ़ता और समर्पित भाव से निरंतर आगे बढ़ते रहें तथा उन आदर्शों को तीव्र गति प्रदान करें। हम सभी शिक्षक और छात्रों की ओर से उनके प्रति विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

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