15 जून तक लागू रहेगा प्रतिबंध, बारिश तक सख्ती जारी

छिंदवाड़ा। जिले में बढ़ते जल संकट की आहट ने प्रशासन को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। ग्रीष्मकाल के तीखे असर को देखते हुए कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी हरेंद्र नारायन ने पूरे जिले को तत्काल प्रभाव से “जल अभावग्रस्त क्षेत्र” घोषित कर दिया है। यह आदेश 15 जून 2026 अथवा मानसून की शुरुआत तक लागू रहेगा।
प्रशासन के इस फैसले के साथ ही जिले में अब बिना अनुमति नए नलकूप (बोरिंग) खनन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। साफ शब्दों में कहें तो अब जमीन के नीचे का पानी भी प्रशासन की निगरानी में रहेगा।
जलस्तर गिरा, प्रशासन सख्त—अब हर बूंद का हिसाब
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की रिपोर्ट ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक सामान्य वर्षा के बावजूद जिले में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। यही कारण है कि आने वाले समय में पेयजल संकट गहराने की आशंका जताई गई है।
स्थिति को संभालने के लिए प्रशासन ने सभी प्राकृतिक और कृत्रिम जल स्रोतों—जैसे नदी, नाले, स्टॉपडेम और सार्वजनिक कुओं—का उपयोग केवल पेयजल और घरेलू जरूरतों तक सीमित कर दिया है। किसी भी अन्य उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
150 मीटर के दायरे में भी रोक, नियम तोड़ा तो होगी सख्त कार्रवाई
यदि किसी व्यक्ति को निजी भूमि पर नलकूप खनन करना है, तो उसे पहले अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) से विधिवत अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इतना ही नहीं, किसी भी शासकीय नलकूप के 150 मीटर के दायरे में नया बोरिंग करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
प्रशासन ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर किसी क्षेत्र में पेयजल संकट गहराता है और वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो पाती, तो जनहित में निजी जल स्रोतों का अस्थायी अधिग्रहण भी किया जा सकता है।
आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ म.प्र. पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 की धारा-9 और भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्टर ने सभी एसडीएम, तहसीलदार, पुलिस अधिकारियों और नगरीय एवं ग्रामीण निकायों को निर्देश दिए हैं कि वे इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।

