window.dataLayer = window.dataLayer || []; function gtag(){dataLayer.push(arguments);} gtag('js', new Date()); gtag('config', 'G-VQJRB3319M'); जंतर-मंतर लाठीचार्ज पर हाईकोर्ट का सख्त रुख, केंद्र और दिल्ली पुलिस से मांगा जवाब - MPCG News

जंतर-मंतर लाठीचार्ज पर हाईकोर्ट का सख्त रुख, केंद्र और दिल्ली पुलिस से मांगा जवाब

रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का आदेश, छात्रों की याचिका पर 11 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुए कथित लाठीचार्ज मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। अदालत ने दोनों पक्षों को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब (काउंटर एफिडेविट) दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही, घटना से जुड़े सभी CCTV फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस.वी. राजू ने कहा कि यदि किसी संज्ञेय अपराध की जानकारी पुलिस को मिलती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के अनीता ठाकुर मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में सार्वजनिक कानून के तहत भी राहत मांगी जा सकती है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं कर रही है और केवल जवाब दाखिल करने तथा रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दे रही है।
अदालत ने आदेश दिया कि याचिकाओं में वर्णित घटना से संबंधित सभी आवश्यक रिकॉर्ड, CCTV फुटेज और वीडियोग्राफी दिल्ली पुलिस एवं केंद्र सरकार अपनी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार सुरक्षित रखें।

याचिकाकर्ता ने लगाए गंभीर आरोप

सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटाने के लिए बल प्रयोग से संबंधित याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि कई पुलिसकर्मी बिना वर्दी और पहचान-पत्र के मौजूद थे तथा उन्होंने प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की। आरोप लगाया गया कि पुलिसकर्मी मंच पर चढ़ गए और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ बल प्रयोग किया।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है और छात्रों की मांग गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जुड़ी थी।

सरकार का पक्ष

ASG एस.वी. राजू ने अदालत में कहा कि सोनम वांगचुक से संबंधित याचिका अन्य याचिकाओं से अलग है और उसमें प्रथम दृष्टया कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता। उन्होंने कहा कि यदि किसी को शिकायत है तो वह कानून में उपलब्ध वैधानिक प्रक्रिया अपना सकता है। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि संबंधित याचिका केवल प्रचार पाने के उद्देश्य से दायर की गई प्रतीत होती है।

प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई पर बहस

वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने दलील दी कि 20 जुलाई को संसद मार्च की घोषणा के कारण बड़ी संख्या में छात्र एकत्र हुए थे, लेकिन उनके हिंसक होने का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है। उन्होंने दावा किया कि कई वीडियो में सादे कपड़ों में मौजूद लोगों को पुलिस के साथ मिलकर प्रदर्शनकारियों पर हमला करते हुए देखा जा सकता है।
वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरिहरन ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल का प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि 90 से अधिक छात्र घायल हुए हैं और कई वीडियो में छात्रों पर लाठियां, पेलेट्स तथा अन्य बल प्रयोग के तरीके दिखाई देते हैं। उन्होंने संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने, पूरी घटना की निष्पक्ष जांच कराने और पुलिस को दिए गए निर्देशों से जुड़े सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की।
विकास सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 149 का हवाला देते हुए कहा कि भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान न्यूनतम बल का प्रयोग किया जाना चाहिए और सिर पर वार करने की अनुमति किसी भी स्थिति में नहीं दी जा सकती। उन्होंने अदालत से पुलिस के बॉडी कैमरों की रिकॉर्डिंग भी सुरक्षित रखने का निर्देश देने का आग्रह किया।

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