window.dataLayer = window.dataLayer || []; function gtag(){dataLayer.push(arguments);} gtag('js', new Date()); gtag('config', 'G-VQJRB3319M'); MP में अस्पताल की लापरवाही से बच्चे की जिंदगी हुई खराब, 15 साल बाद आया कोर्ट से फैसला - MPCG News

MP में अस्पताल की लापरवाही से बच्चे की जिंदगी हुई खराब, 15 साल बाद आया कोर्ट से फैसला

47 लाख रुपये का मुआवजा देने के आदेश

इंदौर। कंज्यूमर कोर्ट में की गई एक शिकायत पर फैसला आते 15 साल लग गए. 15 साल की सुनवाई के दौरान करीब 10 से ज्यादा जज बदल गए. खैर देर आए दुरुस्त आए. इंदौर के एक अस्पताल के खिलाफ लापरवाही का आरोप था. मामले में कंज्यूमर कोर्ट ने फैसला सुनाया है. 2008 में की गई शिकायत पर फैसला सुनाते हुए कंज्यूमर कोर्ट ने इंदौर के सीएचएल अपोलो को शिकायतकर्ता को 47 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है.

मामला इंदौर के सीएचएल अपोलो हॉस्पिटल का है. जहां शिकायतकर्ता ने अपनी पत्नी को भर्ती कराया गया था. जिनका इलाज डॉक्टर नीना अग्रवाल से इंदौर में चल रहा था. डॉक्टर नीना अग्रवाल ने सोनोग्राफी रिपोर्ट भी सामान्य बताई थी. शिकायतकर्ता का आरोप है कि डिलीवरी के लिए उन्होंने पत्नी को सीएचएल अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया था. लेकिन भर्ती करने के बाद मरीज को लावारिस छोड़ दिया गया. इसके बाद लगभग 12 से 13 घंटे के प्रसव पीड़ा में रहने के बाद बच्चा निकालने के लिए वेंटाउस का इस्तेमाल बिना मरीज के परिजनों की अनुमति से किया गया. जिसके कारण बच्चा आज चलने फिरने और अपने दैनिक काम करने में भी असमर्थ है. अस्पताल की लापरवाही की वजह से बच्चे की जिंदगी खराब हो गई है.

पूरे मामले में कोर्ट ने एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया. इस मेडिकल बोर्ड की जांच रिपोर्ट आने के बाद इस पूरे मामले में फैसला सुनाया गया. मेडिकल जांच बोर्ड ने कई बार कल अस्पताल प्रबंधन से दस्तावेज की मांग की लेकिन अस्पताल प्रबंधन समय पर दस्तावेज उपलब्ध नहीं करवा पाया. रिपोर्ट में वेंटाउस किन परिस्थितियों में लगाया इसका प्रमाण अस्पताल प्रबंधन नहीं दे सका जो की एक बड़ी त्रुटि है.

‘बच्चे का इलाज जारी, और ज्यादा मुआवजे की करेंगे की अपील’

इसी के आधार पर कंज्यूमर कोर्ट ने अस्पताल प्रबंधन पर 47 लाख रुपए का मुआवजा शिकायतकर्ता को देने के आदेश जारी किया है. इस पूरे मामले में शिकायतकर्ता ने 2008 में इंदौर कंज्यूमर कोर्ट में केस फाइल किया था. 15 साल तक चली सुनवाई में के बीच 10 ज्यादा जज बदल चुके थे और शिकायतकर्ता को तारीख पर भोपाल से इंदौर आना पड़ता था. इस फैसले के बाद शिकायतकर्ता को न्याय जरूर मिला लेकिन बच्चा आज भी चलने फिरने और अपने दैनिक जीवन के कार्य करने में असमर्थ है. जिसका इलाज अभी जारी है. शिकायतकर्ता के एडवोकेट शांतनु मित्तल ने बताया कि अब इस पूरे मामले में ज्यादा कंपनसेशन के लिए हम अपील करेंगे.

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