window.dataLayer = window.dataLayer || []; function gtag(){dataLayer.push(arguments);} gtag('js', new Date()); gtag('config', 'G-VQJRB3319M'); 5 हजार की रिश्वत लेते BRC गिरफ्तार: लोकायुक्त का बड़ा शिकंजा, सब इंजीनियर भी फंसा - MPCG News

5 हजार की रिश्वत लेते BRC गिरफ्तार: लोकायुक्त का बड़ा शिकंजा, सब इंजीनियर भी फंसा

शिक्षक से शौचालय निर्माण राशि में मांगी थी कमीशन, एटीएम के पास रंगेहाथों पकड़ा गया आरोपी

इंदौर/बड़वानी। मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है, लेकिन इसके बावजूद रिश्वतखोरी पर लगाम लगती नजर नहीं आ रही। ताजा मामला बड़वानी जिले के निवाली से सामने आया है, जहां लोकायुक्त इंदौर की टीम ने एक बीआरसी (ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर) को 5 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई में एक सब इंजीनियर को भी आरोपी बनाया गया है।

शिक्षक से मांगा था कमीशन

लोकायुक्त डीएसपी सुनील तमांग के मुताबिक, फरियादी शिक्षक जितेंद्र सोनी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके स्कूल में बालिका शौचालय निर्माण के लिए 20 हजार रुपये की राशि स्वीकृत हुई थी। आरोप है कि बीआरसी महेंद्र सिंह राठौर और संबंधित सब इंजीनियर ने काम के एवज में कमीशन मांगा। उन्होंने शिक्षक से कहा कि 15 हजार रुपये में काम पूरा कर लिया जाए और बाकी 5 हजार रुपये उन्हें दे दिए जाएं।
शिकायत के अनुसार, इस रकम में 2-2 हजार रुपये बीआरसी और सब इंजीनियर के लिए तथा 1 हजार रुपये बड़वानी में देने की बात कही गई थी।

एटीएम के पास बिछाया जाल

शिकायत की पुष्टि के बाद लोकायुक्त टीम ने योजना बनाकर शिक्षक को 5 हजार रुपये लेकर भेजा। आरोपी बीआरसी ने फरियादी को अपने घर के पास स्थित एटीएम पर बुलाया। जैसे ही उसने रिश्वत की रकम ली, पहले से सादे कपड़ों में मौजूद लोकायुक्त टीम ने उसे मौके पर ही धर दबोचा।
कार्रवाई के बाद बीआरसी महेंद्र सिंह राठौर को गिरफ्तार कर लिया गया और संबंधित सब इंजीनियर को भी मामले में आरोपी बनाया गया है। दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

भोपाल में भी हुई थी कार्रवाई

इससे पहले राजधानी भोपाल में भी लोकायुक्त ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हाउसिंग बोर्ड कार्यालय में पदस्थ डाटा एंट्री ऑपरेटर ज्ञानेंद्र कुमार पटेल को 5 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथों पकड़ा था। आरोपी ने एक रिटायर्ड कर्मचारी से मकान की लीज बढ़ाने के बदले 10 हजार रुपये की मांग की थी। लगातार हो रही लोकायुक्त की कार्रवाइयों से साफ है कि भ्रष्टाचार पर नकेल कसने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन सवाल अब भी वही है—क्या ये कार्रवाई रिश्वतखोरी पर पूरी तरह लगाम लगा पाएगी ?

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