window.dataLayer = window.dataLayer || []; function gtag(){dataLayer.push(arguments);} gtag('js', new Date()); gtag('config', 'G-VQJRB3319M'); हवस, हेकड़ी और हकीकत: जेल से लौटकर भी नहीं सुधरा ‘लिखइया’ - MPCG News

हवस, हेकड़ी और हकीकत: जेल से लौटकर भी नहीं सुधरा ‘लिखइया’

‘बुरा ना मानो होली है’: रंगों के बहाने खुली एक कलंकित कलम की कहानी

बैतूल/सारणी। “बुरा ना मानो होली है” होली का रंग त्यौहार पर हर किसी के सिर चढ़कर बोल रहा हैं, क्यों ना चढ़े यह रंगों का त्योहार साल में एक बार जो आता है, होली का पर्व लोगों के लिए खुशियों का पैगाम लेकर लाता हैं। यह शब्द हम नहीं क्षेत्र के प्रतिष्ठित अखबार दैनिक दबंग मीडिया अखबार के माध्यम से बताई गई है कि इस पर्व पर मीडिया कर्मी भी अपनी लेखनी से रंग बिरंगी खबरों से भ्रष्टाचार में लिप्त कथित अधिकारियों को नंगा करने से नहीं चूकते हैं, इसका दर्द ऐसे अधिकारियों को बहुत त्रास देता हैं। इस क्षेत्र में एक से बढ़कर एक लिखईया हुएं, जिनकी कलम से कभी किसी की जान नहीं गईं, लेकिन एक लिखईया ऐसा हैं जिसने ऐसी कलम चलाई की सामने वाले को मजबूरी में अपने परिवार को अलविदा कहते हुए बंदूक चलाकर अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। इसकी कलम की स्याही ने इतना झूठ लिखा कि एक हँसता खेलता परिवार उजड़ गया। मासूम बच्चों के सर से पिता का साया हट गया, पत्नी का सुहाग उजड़ गया, इस परिवार कि बद्दुआ उस लिखइया के घर भी यही रंग लाएगी, खुशियों के बीच उस दु:खी परिवार में मृतक के पिता, पत्नी, बच्चे के दिल से आने वाले हर त्यौहार में उस लिखइया के लिए बद्दुआ हीं निकल रही हैं। जो शहर में पत्रकारिता पर लेख लिख रहे हैं, स्वयं उनकी तथाकथित पत्रकारिता से एक परिवार का चिराग बुझ गया, और जेल यात्रा के दौरान इस लिखइयां की अधिमान्यता भी रद्द हो गईं। बड़े मजे की बात तो यह हैं कि ऐसा फर्जी व्यक्ति क्षेत्र में पत्रकारिता का पाठ पढ़ाने में लगा है। हद तो तब हो गई जब क्षेत्र में वो तथाकथित लिखइयां ऐसे शान से घूमता हैं जैसे मानो वो 5 माह जेल में देशहित में देश के लिए गया हो, जिसे देख लोग बोलते हैं बेशर्मी की सारी हदें पार करने वाला व्यक्ति किसी को देखना है तो इसे देखें। ये ऐसे पत्रकार हैं जिसके कारनामों पर पूरी किताब लिखी जा सकती हैं। वह खुद दूसरों के ऊपर लेख लिख रहा हैं। यह बड़े हीं मज़े कि बात हैं। और पैसों की लालच में किस हद तक यह लिखइया पूरे क्षेत्र में बदनाम हुआ हैं कि अब फिर से नाम कमाने के लिए दर-दर की ठोकरे खा रहा हैं। नही तो एक समय था जब यह लिखइया जहां खड़ा हो जाता था। जिन लोगों के बीच पहुंच जाता था, सबकी पतलून उतर जाती थीं उसकी कलम में गजब का जादू था। चारों तरफ इस लिखइया की तूती बोला करती थीं, लेकिन कहते हैं ना भगवान के घर देर है पर अंधेर नहीं समय ने ऐसा चक्र चलाया की सलाखों के पीछे जाना पड़ा केस अभी भी चल रहा हैं। श्वास ऊपर नीचे हो रही है।

भाभी जी घर पर है……….

एंड टीवी पर प्रसारित एक सीरियल भाभी जी घर पर हैं। सबसे अधिक मशहूर मनोरंजन सीरियल हैं। जिसका सभी लोग आनंद उठाते हैं, मगर यह लिखइया ने घर में ही भाभी जी के साथ मुंह काला कर लिया। इसके बाद भी भ्रष्ट अधिकारी की चरण वंदना कर दूसरों पर उंगली उठाने से बाज नहीं आ रहा हैं। इतना ही नहीं ये जिस थाली में खाता हैं उसी थाली में छेद नहीं बल्कि पूरी थाली को फोड़ देता हैं। और थाली के टुकड़े भी कबाड़ में बेज कर पैसे कमा लेता ऐसा लिखइया देखा हैं किसी ने बूझो तो जानो होली है बुरा ना मानो होली है।

Google file photo

Related posts

सदालतपुर सेंडोरा में चिमनी ईंट भट्ट मालिक ने वन भूमि और श्मशान भूमि पर किया अतिक्रमण कर कार्यालय भवन बनाने की तैयारी वन अमला बना खामोश आखिर कर्रवाई करे कौन

MPCG NEWS

जनसंपर्क में दिखा निलय का जलवा, बोली आम जनता आ गया हमारा बेटा गले लगाकर दिया विजयी भव: का आशिर्वाद

MPCG NEWS

Betul News: जेसीबी मशीन की चपेट में आने से बुजुर्ग की मौत, जल जीवन मिशन के तहत नाली खोद रही थी जेसीबी

MPCG NEWS

Leave a Comment