बच्चों को सरप्राइज मील का इंतजार, अधिकारी मौन, पालक बोले ये आंगनवाड़ी है या जादू का शो ?
बैतूल। जिले के घोड़ाडोंगरी क्षेत्र की आंगनवाड़ियों में इन दिनों बच्चों के पोषण से ज्यादा सरप्राइज गिफ्ट पर जोर नजर आ रहा है। यहां मध्यान भोजन की स्थिति कुछ ऐसी है कि अगर किसी दिन समय पर खाना मिल जाए तो बच्चे खुद को लकी विनर समझने लगते हैं।
असल में यहां भोजन का कोई तय दैनिक मेन्यू या समय नहीं है। यानी कब क्या बनेगा और कब मिलेगा- ये सब किसी गुप्त फार्मूले पर चलता है। कर्मचारी भी इस सिस्टम को मजाकिया अंदाज में “मूड बेस्ड सर्विस” बताते हैं।
नाम न बताने की शर्त पर किसी कर्मचारी ने बताया कि, यहां मेन्यू नहीं, मूड चलता है कभी पहले खाना, कभी बाद में और कभी-कभी तो छुट्टी के बाद भी खाना देना पड़ता है। हम भी कन्फ्यूज रहते हैं कि आज नियम क्या है। बच्चों ने भी इस अनोखे सिस्टम को अपने तरीके से समझ लिया है। अब वे पढ़ाई से ज्यादा इस बात का इंतजार करते हैं कि आज खाना पहले मिलेगा या घर जाकर मम्मी के हाथ का ही खाना पड़ेगा ?
स्थानीय लोगों का कहना है
पालकों का भरोसा भी धीरे-धीरे डगमगाने लगा है। कई अभिभावक अब बच्चों को आंगनवाड़ी भेजने से कतराने लगे हैं। उनका कहना है जब खाना ही टाइम पर नहीं मिलेगा तो बच्चे को भेजकर फायदा क्या ? घर पर ही सही समय पर खाना मिल जाता है जिससे हमारे बच्चे का स्वास्थ्य ठीक रहेगा।
सूत्रों की मानें तो इस पूरी व्यवस्था में नीचे के कर्मचारियों से ज्यादा ऊपर बैठे अधिकारियों की भूमिका चर्चा में है। जिले के किसी कर्मचारियों का साफ कहना है कि यह जो कर रहे हैं, ऊपर के निर्देशों के अनुसार ही कर रहे हैं। यहां सब कुछ ‘इशारों’ पर चलता है।
इधर जब इस पूरे मामले को लेकर महिला बाल विकास विभाग से संपर्क किया गया और महिला बाल विकास बैतूल जिला कार्यक्रम अधिकारी गौतम अधिकारी से लगातार बात करने की कोशिश की गई, तो स्थिति कुछ ऐसी रही जैसे सिस्टम ने खुद ही “साइलेंट मोड” ऑन कर लिया हो।
स्थानीय जानकार भी अब तो तंज कसते हुए कहने लगे कि जिले साहब शायद इन दिनों चैत्र नवरात्र में माता रानी से डायरेक्ट डील कर रहे होंगे कि आंगनवाड़ी बाद में, पहले प्रमोशन या फिर बड़े घोटाले की फाइल माता रानी के दरबार भेजी जा रही होगी।

