window.dataLayer = window.dataLayer || []; function gtag(){dataLayer.push(arguments);} gtag('js', new Date()); gtag('config', 'G-VQJRB3319M'); श्रीमद भागवत कथा में शिव सती चरित्र का हुआ वर्णन, कथा सुन भाव विभोर हुए श्रोता - पं.कौशलेंद्र दुबे - MPCG News

श्रीमद भागवत कथा में शिव सती चरित्र का हुआ वर्णन, कथा सुन भाव विभोर हुए श्रोता – पं.कौशलेंद्र दुबे

दैनिक प्राईम संदेश  एस.एन.मिरी

जांजगीर चांपा ।

चांपा के समीप स्थित ग्राम उच्चभिट्ठी में यादव समाज द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण कथा में शिव सती की कथा का गुणगान किया।श्रीमद् भागवत कथा के दुसरे दिन कथा सुनाते हुए कथा कौशलेंद्र दुबे महाराज ने बताया कि किसी भी स्थान पर बिना निमंत्रण जाने से पहले इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि जहां आप जा रहे है वहां आपका, अपने इष्ट या अपने गुरु का अपमान न हो कथा वाचक महाराज दुबे ने कहा कि यदि अपने गुरू,इष्ट के अपमान होने की आशंका हो तो उस स्थान पर जाना नहीं चाहिए। चाहे वह स्थान अपने जन्म दाता पिता का ही घर क्यों न हो। प्रसंगवश भागवत कथा के दौरान शिव सती चरित्र के प्रसंग को सुनाते हुए भगवान शिव की बात को नहीं मानने पर सती के पिता के घर जाने से अपमानित होने के कारण स्वयं को अग्नि में स्वाह होना पड़ा था।माता सती के पिता दक्ष ने एक विशाल यज्ञ किया था और उसमें अपने सभी संबंधियों को बुलाया। लेकिन बेटी सती के पति भगवान शंकर को नहीं बुलाया। जब सती को यह पता चला तो उन्हें बड़ा दुख हुआ और उन्होंने भगवान शिव से उस यज्ञ में जाने की अनुमति मांगी। लेकिन भगवान शिव ने उन्हें यह कहकर मना कर दिया कि बिना बुलाए कहीं जाने से इंसान के सम्मान में कमी आती है। लेकिन माता सती नहीं मानी और राजा दक्ष द्वारा आयोजित यज्ञ में पहुंच गई। वहां पहुंचने पर सती ने अपने पिता सहित सभी को बुरा भला कहा और स्वयं को यज्ञ अग्नि में स्वाहा कर दिया। जब भगवान शिव को ये पता चला तो उन्होंने अपना तीसरा नेत्र खोलकर राजा दक्ष की समस्त नगरी तहस-नहस कर दी और सती का शव लेकर घूमते रहे। भगवन विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के टुकड़े-टुकड़े किए। जहां शरीर का टुकड़ा गिरा वहां वहा शक्तिपीठ स्थापित हुई।महाराज ने बताया कि भागवत कथा की सभी व्यवस्थाएं यादव समाज के द्वारा सामूहिक रूप से की जा रही है। श्रीमद् भागवत महापुराण के दुसरे दिन प्रवचन सुनने के लिए पूरा गांव उमड़ पड़ा। भागवत पुराण पर दिए जा रहे प्रवचनों को सुनने के प्रति जनता में अपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। कथा के साथ साथ भजन संगीत भी प्रस्तुत किए गए। साथ ही प्रतिदिन श्री भागवत महापुराण की आरती के बाद भण्डारे का आयोजन भी ग्रामवासियों के द्वारा किया जा रहा है।

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