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राज्य युवा नीति: युवा विकास की ओर एक कदम, पर मंजिल अभी दूर  — विमल जाट 

राज्य युवा नीति: युवा विकास की ओर एक कदम, पर मंजिल अभी दूर

— विमल जाट

आनंद गौर हरदा जिला संवाददाता

 

 

हरदा । युवा एक महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय हैं और किसी राष्ट्र की सफलता और प्रगति की कुंजी हैं। अधिकांश वैश्विक ‘सतत विकास लक्ष्यों’ (एसडीजी) में युवाओं को फोकस क्षेत्र के रूप में रखा गया है, जो युवा आबादी के महत्व और उनमें निवेश की आवश्यकता पर जोर देता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य युवा नीति, 2023 बनाई है। इस नीति को बनाने में प्रदेश भर से १०००० से अधिक युवाओं ने विभिन्न परामर्शों में शामिल होते हुए सुझाव दिए वहीं एमपी गर्वनमेंट पोर्टल के माध्यम से ३०१८ सुझाव प्राप्त हुए. वही राष्ट्रीय ड्राफ्ट युवा नीति २०२१, अन्य देशों और राज्यों की युवा नीतियों को सन्दर्भ लेते हुए – मध्य प्रदेश राज्य की युवा नीति निर्माण की प्रक्रिया पूर्ण की गई।

 

भारत में दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है और विश्व स्तर पर 15-29 वर्ष आयु वर्ग के हर चार में से एक भारतीय है। वे भारत की कुल आबादी का लगभग 34% हिस्सा हैं। उनकी हिस्सेदारी में अनुमानित गिरावट के बावजूद, यह अनुमान लगाया गया है कि 2030 तक भारत में 365 मिलियन युवा होंगे, जो जनसंख्या का 24% है। चीन, अमेरिका और जापान जैसे अन्य देश बढ़ती आबादी की समस्याओं से जूझ रहे हैं, ऐसे में यह एक ऐसा संसाधन है जिसका लाभ भारत उठा सकता है।

 

मध्यप्रदेश की आबादी लगभग ९ करोड़ के आसपास है! युवाओं की आबादी लगभग 2.5 करोड़ के आसपास होगी जिनकी उम्र १५-२९ वर्ष है। मध्यप्रदेश देश में सबसे अधिक युवा आबादी वाले प्रदेशों में बिहार, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के साथ शामिल है. इन पांच राज्यों में देश की लगभग आधी युवा आबादी यहाँ रहती है.

 

भविष्य के लिए मध्य प्रदेश में युवा विकास की दृष्टि से, मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य की युवा नीति, 2023 तैयार की है, यह एक सराहनीय कदम है. राज्य द्वारा युवाओं के लिए अपनाई और कार्यान्वित की गई नीति की कुछ सकारात्मक बातें आने वाले वर्षों में युवाओं पर वास्तविक प्रभाव पैदा करने की संभावना रखती हैं और जो आगे चलकर समाज में अच्छा असर पैदा कर सकते हैं। नीतिगत सिफारिशें आठ फोकस क्षेत्रों शिक्षा और कौशल, रोजगार और उद्यमिता, स्वास्थ्य, युवा नेतृत्व और सामाजिक कार्य, खेल और फिटनेस, कला और संस्कृति, पर्यावरण सुरक्षा एवं समावेशन और समता पर ध्यान केंद्रित करती हैं जो युवाओं के समग्र विकास के लिए आवश्यक हैं।

 

विभिन्न तरह के युवा और वर्तमान युवा नीति –

 

प्रदेश में लगभग २२ प्रतिशत आदिवासी, १६ प्रतिशत दलित, ७ प्रतिशत मुस्लिम आबादी है, लड़कियां और युवा महिलाएं, शहरी बस्तियों में रहने वाले युवा, स्कूल और कॉलेज से ड्राप आउट युवा, पलायन करने वाले मानव दुर्व्यापर, नशे और क्राइम से जुड़े, अनाथालय और जेल में रह रहे युवा आदि युवाओं की आबादी का आंकलन और उनकी ज़रूरतों और समस्याओ का आंकलन इस नीति में और स्पष्ट तरीके से आता तो यह और प्रभावी हो सकती थी। आदिवासी क्षेत्रों में आठवी के बाद ड्राप आउट रेट बहुत अधिक है! यह दसवी में और अधिक होते होते उच्च शिक्षा तक १०-२० प्रतिशत ही रह जाती है. युवा नीति में आदिवासी समुदाय में शिक्षा और ड्राप आउट को कम करने के लिए विशेष योजना या बात नहीं की गई है. स्कूल और कॉलेज की दुरी की वजह से ड्राप आउट और शिक्षा का स्तर बहुत निम्न है। इसको दूर करने के लिए विशेष प्रयास जैसे आवागमन के साधन या किराया का प्रावधान जैसे बाते हो सकती है. समय-समय पर मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों का गुणवत्तापूर्ण अंकेक्षण और विद्यार्थियों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए यह सुनिश्चित करना कि छात्रों की उपस्थिति कम से कम ७५ प्रतिशत हो. शिक्षा, उद्यमिता और प्रशिक्षण से बाहर (neet) युवाओं के लिए विशेष शिक्षा और प्रशिक्षण प्रोग्राम बनाने की ज़रुरत है, जिस पर नीति में बात नहीं की गई है. पलायन करने वाले युवाओ के लिए जिला स्तर पर केंद्र हो उन्हें पंजियत किया जाये और उनके स्वस्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा और आपातकालीन स्थिति में निशुल्क स्वास्थ्य सेवा, निशुल्क क़ानूनी सहायता इत्यादि पर जोर दिए जाने की बात होनी चाहिए. युवा महिलाओं के रहने के लिए जिला स्तर पर हॉस्टल की सुविधा . जिला स्तर पर उद्यमिता और सामजिक उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय कोच/मेंटर का पूल बनाने के लिए प्रयास किए जाए.

 

सामान्य, यौन एवं प्रजनन, मानसिक स्वास्थ्य

 

किशोर मैत्रीपूर्ण स्वास्थ्य क्लिनिक हो जिला और ब्लाक स्तर पर, मानसिक स्वस्थ्य की के परामर्श और इलाज़ की सुविधा कम से कम जिला स्तर पर हो, जीवन कौशल शिक्षा – स्कूल और स्कूल के बाहार भी, भी लड़कियों के लिए पोषण आहार की सुविधा – आंगनवाडी केन्द्रों के माध्यम से, सभी लड़कियों के लिए मासिक धर्म के दौरान मुफ्त सेनेटरी नेपकिन की सुविधा –स्कूल, आंगनवाडी और पंचायत स्तर पर .

 

युवा विकास के लिए नजरिया –

 

राज्य स्तर पर युवा विकास इंस्टिट्यूट का निर्माण किया जाए, इंटर्नशिप के मौके युवाओं के लिए बढ़ाए जाएं, युवा समूहों के निर्माण और क्षमतावर्धन के कार्यक्रम प्रारंभ किए जाएं, स्कूल, कॉलेज और समुदाय के स्तर पर स्वयंसेवक के रूप में सीखने और कार्य करने के मौके ज्यादा से ज्यादा बनाए जाएं, एन एस एस में दुगने पंजीयन और सीखने के लिए बेहतर कदम उठाये जाएं, युवाओं के लिए अन्य राज्यों, जिलो के बीच एक्सचेंज कार्यक्रम बनाए जाएं, जिला और ब्लाक स्तर पर युवा संसाधन केन्द्रों का निर्माण किया जाए, राजनीति में युवाओं की भागीदारी के लिए राजनितिक आरक्षण जैसे कदम उठाना, वंचित वर्ग के युवा- आदिवासी, दलित, लड़कियां, विभिन्न तरह से योग्य और अल्पसंख्यक युवाओं के नेतृत्व विकास के लिए विशेष प्रयास हर एक स्तर पर हो.

 

समावेशन और समता-

 

जाति, धर्म, लिंग, क्षेत्र और पहचान के आधार पर भेदभाव का सामना करने वाले युवाओं के लिए- सुरक्षित स्थान, क़ानूनी सहयता, काउंसलिंग इत्यादि की व्यवस्था जिला स्तर पर की जानी सुनिश्चित की जाए, युवाओं के अधिकार और क़ानूनी सुरक्षा के लिए जागरूकता की जानी चाहिए, प्रदेश में किशोर न्याय अधिनियम और युवाओ के न्यायिक व्यवस्था को त्वरित और मज़बूत किया जाए, सभी सामाजिक सुरक्षा योजनाओ का लाभ त्वरित मिले .

 

बजट और विभाग का नाम

 

नीति में युवा बजट अलग से बनाये जाने की बात बहुत ही महत्वपूर्ण है. यह सुनिश्चित किए जाने की ज़रुरत है कि युवा विकास के लिए प्रदेश के कुल बजट का कम से कम १ प्रतिशत युवा विकास के कामों के लिए आवंटित किया जाए. वर्तमान वर्ष का मध्यप्रदेश राज्य का कुल बजट २८१५५२ करोड़ है जिसमें से युवा विकास कार्यो के लिए ३४७ करोड़ की मांग की गई है जो की कुल बजट का सिर्फ 0.12 प्रतिशत है. मंत्रालय का नाम खेल एवं युवा कल्याण विभाग है जिसे बदलकर युवा विकास मंत्रालय रखा जाना चाहिए.

 

बेहतर क्रियान्वयन के लिए कुछ सुझाव

 

राज्य स्तर, जिला स्तर और ब्लाक स्तर पर नीति के क्रियान्वयन के मानक तय होने चाहिए। सभी प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर एक प्रगति को मापने का मेट्रिक्स बनाया जाना, हर तीन वर्षों में पॉलिसी का रिव्यू किया जाना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। नोडल एजेंसी और सहायक एजेंसीज की भूमिकाएं तय की जानी चाहिए। प्रगति की मापने के लिए एक समिति का गठन किया जाए, युवा कार्य विभाग इसको लेकर पांच वर्षों की योजना बनाई जानी चाहिए। और आगे उसे एक-एक वर्ष में तोड़कर कार्यान्वित , कार्य की प्रोग्रेस को मापने के लिए कार्य के आंकड़ों को हर एक थीम के आधार पर बनाकर एकत्रित किया जाना सुनिश्चित होना चाहिए। युवाओं के साथ कार्य कर रही सभी संस्थाओ के साथ नेटवर्किंग और जुडाव की रणनीति बनाई जानी चाहिए। जिला स्तर पर जिला कलेक्टर को युवा नीति के क्रियान्वयन और प्रगति का मूंल्याकन करने के लिए जिम्मेदार बनाया जाना चाहिए और हर तीन माह में कलेक्टर के साथ नोडल विभाग के द्वारा समीक्षा की जानी सुनिश्चित की जानी चाहिए। इन बिंदुओं को ध्यान में रखकर ही इस युवा नीति का बेहतर क्रियान्वयन हो सकता है।

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