window.dataLayer = window.dataLayer || []; function gtag(){dataLayer.push(arguments);} gtag('js', new Date()); gtag('config', 'G-VQJRB3319M'); भोपाल नगर निगम में करोड़ों का फर्जी बिल घोटाला, लोकायुक्त का बड़ा एक्शन - MPCG News

भोपाल नगर निगम में करोड़ों का फर्जी बिल घोटाला, लोकायुक्त का बड़ा एक्शन

लोकायुक्त की छापेमारी, अपर आयुक्त के खिलाफ भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी पर FIR 

सॉफ्टवेयर से बनाए फर्जी बिल, नगर निगम से करोड़ों की निकासी

भोपाल। नगर निगम में फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपए के भुगतान का बड़ा घोटाला सामने आने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नगर निगम के अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी की धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। शिकायत के बाद की गई प्रारंभिक जांच में आरोपों को गंभीर पाए जाने पर अदालत से सर्च वारंट लिया गया और नगर निगम के कई कार्यालयों में एक साथ छापेमारी की गई।

फर्जी बिलों से निकाले करोड़ों रुपए

लोकायुक्त कार्यालय को नवंबर 2025 में मिली शिकायत में आरोप लगाया गया था कि नगर निगम के कुछ कर्मचारियों ने आपसी मिलीभगत से बिना किसी वास्तविक काम के फर्जी बिल तैयार कराकर करोड़ों रुपए का भुगतान करा दिया। जांच में यह भी सामने आया है कि भुगतान प्रक्रिया को वैध दिखाने के लिए सॉफ्टवेयर का उपयोग किया गया।
बताया जा रहा है कि इन बिलों के आधार पर कई निजी फर्मों के नाम पर भुगतान किया गया, जिनमें से कुछ फर्में अधिकारियों के परिचितों या रिश्तेदारों से जुड़ी बताई जा रही हैं। इससे पूरे मामले में बड़े स्तर पर सांठगांठ की आशंका जताई जा रही है।

लोकायुक्त की कई विभागों में छापेमारी

लोकायुक्त पुलिस की टीम ने शुक्रवार सुबह करीब साढ़े दस बजे नगर निगम के कई विभागों में एक साथ कार्रवाई की। इस दौरान लेखा शाखा, कंप्यूटर शाखा और डेटा सेंटर के अलावा लिंक रोड-2 स्थित मुख्य निगम कार्यालय और फतेहगढ़ क्षेत्र के पुराने कार्यालय में भी जांच की गई। छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने बड़ी मात्रा में दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए हैं। साथ ही लगभग दस वर्षों से जुड़े सर्वर डेटा को भी अपने कब्जे में ले लिया गया है, ताकि पुराने भुगतान और कार्यों का मिलान किया जा सके।

तीन विभागों में गड़बड़ी के संकेत

प्रारंभिक जांच में मोटर वर्क शाखा, जल कार्य विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग से जुड़े कुछ भुगतान में अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। इसके चलते जांच एजेंसी ने भुगतान प्रणाली से जुड़े एसएपी सॉफ्टवेयर का पूरा डिजिटल डेटा सुरक्षित कर लिया है।
अब विशेषज्ञों की मदद से इस डेटा का विश्लेषण किया जाएगा, जिससे यह पता लगाया जा सके कि किन परियोजनाओं या कार्यों के नाम पर राशि जारी की गई और क्या वास्तव में उन कार्यों को किया भी गया था या नहीं।

जांच में खुलेंगे कई और नाम

लोकायुक्त अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल डेटा और दस्तावेजों की जांच के बाद इस पूरे घोटाले में शामिल कर्मचारियों, अधिकारियों और संबंधित फर्मों की भूमिका भी सामने आएगी। जांच पूरी होने के बाद मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

गुणवंत सेवतकर, अपर आयुक्त

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