window.dataLayer = window.dataLayer || []; function gtag(){dataLayer.push(arguments);} gtag('js', new Date()); gtag('config', 'G-VQJRB3319M'); गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों को तथा गरीबों को मुफ्त में मिलने वाला चावल खरीद रहे हैं व्यापारी पॉलिश कर वापस ₹28 तक मार्केट में बिक्री। - MPCG News

गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों को तथा गरीबों को मुफ्त में मिलने वाला चावल खरीद रहे हैं व्यापारी पॉलिश कर वापस ₹28 तक मार्केट में बिक्री।

लोकेशन

जिला सुरजपुर छत्तीसगढ़

संवाददाता शत्रुघन तिवारी

 

हेड लाईन

 

गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों को तथा गरीबों को मुफ्त में मिलने वाला चावल खरीद रहे हैं व्यापारी पॉलिश कर वापस ₹28 तक मार्केट में बिक्री।

 

एंकर

सरकार की सार्वजनिक वितरण प्रणाली योजना के तहत गरीबों को बांटा जाने वाला चावल कुछ मुनाफाखोरों के लिए मोटी कमाई का जरिया बन चुका है छोटे दुकानों से साथ गांठ कर बड़े व्यापारी इसे खरीद रहे हैं ग्रामीणों के द्वारा 15-16 रुपए किलो की दर से इस कारोबारी तक पहुंचाया जा रहा है इसके बाद यही चावल पॉलिश और कटिंग कर वापस बाजार में पहुंच रहा है जिसे ग्रामीण 25 से 28 रुपए तक खरीद रहे हैं,,,

 

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार लोकल स्तर पर स्नैकर कुरकुरे बनाने वाली कंपनियां भी चावल व्यापारियों से खरीद रहे हैं क्योंकि इन स्नैकर कुरकुरे नमकीन में चावल के आटे की जरूरत पड़ती है जबकि सरकारी योजना का चावल सिर्फ गरीब जरूरतमंद राशन कार्ड धारीयो के द्वारा ही उपयोग में लाया जा सकता है इसका व्यापारिक इस्तेमाल गैरकानूनी है,,,

 

आपको बताते चलें कि जिले के आसपास गांव में ही कई ऐसे व्यापारी हैं जो पीडीएस चावल को ग्रामीणों से 15 से 16 रुपए प्रति किलो के हिसाब से खरीदते हैं,,,

 

पीडीएस का चावल मोटा होता है इसलिए व्यापारी इसे खरीद कर राइस मिलों में मशीन से घिसाई कर चावल को पतला करवाते हैं पॉलिश कर चावल पर चमक लाई जाती है फिर यही चावल बाजार में लगभग 28 रुपए प्रति किलो तक बिकता है,,,

 

पीडीएस चावल की इस तरह से हेरा फेरी से इस बात का अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि गरीबों को मिलने वाला मुफ्त का चावल का किस तरह से खरीद फरोख्त जारी है,,,

आपको बताते चलें कि जिले में ही बहुत सारे ऐसे व्यापारी हैं जो पीडीएस का चावल को खरीद फरोख्त कर स्थानीय दुकानदार तथा मिलर की मोटी रकम कमाने का जरिया बना हुआ है,,,

 

अब देखने वाली बात होगी कि जिले के कलेक्टर व खाद्य विभाग उक्त मामले में कितनी कार्यवाही करता है

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