window.dataLayer = window.dataLayer || []; function gtag(){dataLayer.push(arguments);} gtag('js', new Date()); gtag('config', 'G-VQJRB3319M'); सारणी में दिनदहाड़े कोयला चोरी पर पाथाखेड़ा पुलिस की बड़ी कार्रवाई - MPCG News

सारणी में दिनदहाड़े कोयला चोरी पर पाथाखेड़ा पुलिस की बड़ी कार्रवाई

ट्रैक्टर चालक और मालिक फरार तलाश जारी, WCL प्रबंधन पर गंभीर सवाल

बैतूल/सारणी। कोयलांचल क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय कोयला माफियाओं पर आखिरकार पुलिस का शिकंजा कस ही गया। गुरुवार को पाथाखेड़ा पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए अवैध कोयले से लदा एक ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त किया है। हालांकि, यह कार्रवाई सिर्फ एक जब्ती नहीं है, बल्कि यह वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) की ‘सुरक्षा’ के नाम पर चल रही भारी लापरवाही और अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका पर भी एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है।

दरअसल पुलिस सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, गुरुवार को ढुमका ढाना रोड पर अवैध कोयले का परिवहन किए जाने की सूचना मिली थी। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने तत्काल घेराबंदी की। जांच के दौरान वहां से गुजर रहे एक ट्रैक्टर को रोका गया, जिसकी तलाशी लेने पर ट्राली में प्रचुर मात्रा में अवैध कोयला पाया गया। पुलिस को देखते ही ट्रैक्टर चालक मौके का फायदा उठाकर फरार हो गया। पुलिस ने ट्रैक्टर को जब्त कर पाथाखेड़ा चौकी में खड़ा कर दिया है और अज्ञात चोरों के खिलाफ मामला पंजीबद्ध कर लिया है।

‘घर का भेदी लंका ढाए’ WCL अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में

विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि जब्त किया गया कोयला WCL की छतरपुर खदान का है। यह घटना यह साबित करने के लिए काफी है कि खदान की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। सूत्र बताते हैं कि यह खेल अधिकारियों और सुरक्षा विभाग की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। “घर का भेदी लंका ढाए” की तर्ज पर कुछ विभागीय अधिकारी और सुरक्षाकर्मी चंद रुपयों की खातिर विभाग को चुना लगा रहे हैं।

यह पहला मौका नहीं है जब छतरपुर माइंस से कोयला चोरी हुआ हो। इससे पहले भी कई बार ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन अधिकारियों द्वारा सुरक्षा को लेकर बरती जा रही ‘कुंभकर्णी नींद’ टूटने का नाम नहीं ले रही है। माइंस की बाउंड्री के अंदर घुसकर तस्कर बेखौफ होकर कोयला निकाल रहे हैं, जो सुरक्षा एजेंसियों की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह है।

200 रुपये की बोरी से 8000 रुपये तक का ‘काला कारोबार’

कोयला तस्करी का यह नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से चल रहा है। दबी जुबान से स्थानीय लोगों ने बताया कि ढुमका ढाना और आसपास के ग्रामीण माइंस की बाउंड्री में घुसकर बोरियों में कोयला भरकर लाते हैं। इन बोरियों को महज 200 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से कोल माफियाओं को बेचा जाता है। इसके बाद, माफिया इस सरकारी संपत्ति को अवैध ईंट भट्टों पर 8000 रुपये प्रति ट्रॉली के ऊंचे दामों पर खपा देते हैं। गरीबों की मजबूरी और अधिकारियों की लालच के बीच यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है।

धनु और मुकेश धुर्वे का नाम आया सामने

पुलिस की प्रारंभिक जांच और स्थानीय चर्चाओं में यह बात सामने आई है कि जो ट्रैक्टर बुधवार को जब्त किया गया, वह ढुमका ढाना निवासी धनु धुर्वे का है। इसे मुकेश धुर्वे नामक व्यक्ति किराए पर लेकर रेत और कोयले का अवैध परिवहन करता है। पुलिस अब ट्रैक्टर के आधार पर मालिक और फरार चालक की सरगर्मी से तलाश कर रही है।

सवाल अब भी कायम है

पुलिस की यह कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन बड़ा सवाल WCL प्रबंधन से है। आखिर कब तक राष्ट्रीय संपत्ति की यह लूट अधिकारियों की नाक के नीचे होती रहेगी? क्या सुरक्षा में सेंध लगाने वालों पर कोई ठोस कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी फाइलों में दफ्न हो जाएगा ?

इनका कहना है

मामला कोयला चोरी का बना है दुमकाधना रोड से पकड़ा है चालक फरार कोई ट्रैक्टर को छुड़ाने नहीं आया कोई आएगा तो और जानकारी का खुलासा होगा।

अजय भाट, एएसआई, पाथाखेड़ा चौकी

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