सिवनी जैसा ‘हवाला कांड’, एक फोन से खुलासा
गुना। मध्य प्रदेश के गुना जिले में पुलिस महकमे को शर्मसार करने वाला एक बड़ा ‘हवाला कांड’ सामने आया है। एक करोड़ रुपये की संदिग्ध नकदी मिलने के बाद कथित तौर पर 20 लाख रुपये में मामला ‘सेटल’ करने का आरोप है, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
1 करोड़ की बरामदगी, नियमों को दरकिनार करने का आरोप
घटना गुरुवार-शुक्रवार की दरम्यानी रात की बताई जा रही है। नेशनल हाईवे-46 पर रूठियाई चौकी के पास वाहन चेकिंग के दौरान गुजरात नंबर की एक कार को रोका गया। तलाशी में करीब 1 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए।
नियमों के अनुसार इतनी बड़ी रकम मिलने पर आयकर विभाग और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देना जरूरी होता है, लेकिन आरोप है कि चौकी स्तर पर ही इस मामले को ‘मैनेज’ करने की कोशिश की गई।
कैसे हुआ ‘सेटिंग’ का खेल ?
घटना गुरुवार-शुक्रवार की दरम्यानी रात की बताई जा रही है। नेशनल हाईवे-46 पर रूठियाई चौकी के पास वाहन चेकिंग के दौरान गुजरात नंबर की एक कार को रोका गया। तलाशी में करीब 1 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए।
नियमों के अनुसार इतनी बड़ी रकम मिलने पर आयकर विभाग और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित करना जरूरी होता है, लेकिन आरोप है कि चौकी स्तर पर ही पूरे मामले को ‘मैनेज’ करने की कोशिश की गई।
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस और व्यापारी के बीच 20 लाख रुपये में डील तय हुई और शेष 80 लाख रुपये लेकर वाहन को छोड़ दिया गया।
फोन कॉल के बाद खुला मामला, कार्रवाई तेज
मामले ने उस वक्त तूल पकड़ा जब चर्चा हुई कि गुजरात के एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के हस्तक्षेप के बाद कथित रूप से लिए गए 20 लाख रुपये वापस कर दिए गए। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसी ‘फोन कॉल’ ने पूरे घटनाक्रम की परतें खोल दीं।
डीआईजी का सख्त रुख, जांच के आदेश
डीआईजी अमित सांघी ने स्पष्ट कहा कि प्रथम दृष्टया पुलिस द्वारा निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। उन्होंने पूरे मामले की गहन जांच के आदेश दिए हैं और संकेत दिए हैं कि आगे और भी बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
चार पुलिसकर्मी सस्पेंड, विभाग में हड़कंप
इस मामले में एसपी अंकित सोनी ने धरनावदा थाना प्रभारी एसआई प्रभात कटारे सहित कुल चार पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है। कार्रवाई के बाद पूरे पुलिस विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
सिवनी कांड जैसी गूंज, अब आगे क्या ?
इस मामले की तुलना पहले चर्चित ‘हवाला कांड’ से की जा रही है, जिससे पुलिस विभाग की साख पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस अब उस व्यापारी, वाहन और बरामद रकम की असली हकीकत खंगाल रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि पैसा किसका था और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जाना था।

