मजदूरों की गाढ़ी कमाई डकार कर सांप की तरह कुंडली मारकर बैठे भ्रष्ट ठेकेदारो की हुई शिकायत
वेतन न मिलने से मजदूरों ने सारनी थाने में की FIR की मांग, न्याय नहीं मिलने से करेंगे मुख्यमंत्री के दरवाजे पर दस्तक
बैतूल/सारनी। बैतूल जिले की वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) के पाथाखेड़ा क्षेत्र में ठेका मजदूरों के शोषण और वेतन भुगतान का विवाद अब एक विस्फोटक मोड़ पर पहुंच चुका है। लगातार सात दिनों से चल रही हड़ताल और तमाम अपीलों के बावजूद, लालची और भ्रष्ट ठेकेदार मजदूरों के पसीने की कमाई डकार कर सांप की तरह कुंडली मारकर बैठे हुए हैं। इन ठेकेदारों के बेलगाम रवैये और अकड़पन से त्रस्त होकर गुरुवार को लगभग 176 ठेका मजदूर सामूहिक रूप से थाना सारनी पहुंचे और संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए लिखित शिकायत सौंपी।
प्रबंधन के आदेशों को ठेंगा, ठेकेदारों में कार्रवाई का खौफ शून्य
इस पूरे घटनाक्रम में ठेकेदारों का रवैया बेहद अड़ियल और तानाशाही पूर्ण है। इतना बड़ा श्रमिक आंदोलन खड़ा होने के बावजूद ठेकेदारों की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा है। ठेकेदार खुलेआम डब्ल्यूसीएल प्रबंधन के आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। प्रबंधन के निर्देश इनके लिए महज कागज का टुकड़ा बनकर रह गए हैं। इन भ्रष्ट ठेकेदारों के भीतर इस आंदोलन के बाद होने वाली किसी भी कानूनी या विभागीय कार्रवाई का तनिक भी डर नहीं है। वे पूरी तरह से निरंकुश हो चुके हैं और अपनी मनमानी पर उतारू हैं।
मजदूरों का दर्द और दो वक्त की रोटी का संकट
मजदूरों का आरोप है कि पिछले 2 से 3 महीनों से उन्हें उनका जायज वेतन नहीं दिया गया है। पसीना बहाने के बावजूद वेतन रुकने से मजदूर परिवारों के सामने जीवन यापन का गहरा संकट पैदा हो गया है। घर के राशन से लेकर बच्चों की स्कूल फीस और परिवार के भरण-पोषण के लिए मजदूर दर-दर भटकने को मजबूर हैं, लेकिन धन के लालच में अंधे हो चुके ठेकेदारों का दिल नहीं पसीज रहा।
विफल वार्ता और बढ़ता आक्रोश
मजदूरों, प्रबंधन और ठेकेदारों के बीच लगातार बैठकों और वार्ताओं का दौर चला। मजदूरों ने प्रबंधन को 7 दिन का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन समय सीमा बीतने के बाद भी ठेकेदारों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। श्रमिक नेता प्रदीप नागले, संतोष देशमुख और मनोज पवार ने क्षेत्रीय महाप्रबंधक (एपीएम) ललित कुमार तिर्की से कई बार मुलाकात कर ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की, लेकिन प्रबंधन की ओर से कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे ठेकेदारों के हौसले और बुलंद हो गए।
आगे की रणनीति- आमरण अनशन की चेतावनी
लगातार हो रहे शोषण और अन्याय के खिलाफ खड़े मजदूरों ने अब स्पष्ट और सख्त चेतावनी दी है कि जब तक बकाया वेतन का एक-एक पैसा उनके बैंक खातों में जमा नहीं हो जाता, कोई भी मजदूर भूमिगत कोयला खदानों में काम पर नहीं लौटेगा। यदि उनकी मांगें तुरंत नहीं मानी गईं और इन भ्रष्ट ठेकेदारों पर लगाम नहीं कसी गई, तो मजदूर आमरण अनशन जैसे कठोर कदम उठाने को विवश होंगे। साथ ही यदि स्थानीय स्तर पर उनकी सुनवाई नहीं होती है और मजदूरों को उनकी हक की कमाई का पैसा नहीं मिलता, तो मजदूर न्याय पाने के लिए राजधानी का रुख करेंगे और सीधे मुख्यमंत्री के दरवाजे को खटखटाएंगे।
इस अन्यायपूर्ण स्थिति को देखते हुए आसपास के विभिन्न सामाजिक और श्रमिक संगठनों ने भी मजदूरों को अपना खुला समर्थन दे दिया है। क्षेत्र में श्रमिक असंतोष की आग तेजी से फैल रही है, और यदि प्रशासन तथा प्रबंधन ने समय रहते इन निरंकुश ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
इनका कहना है
मैने संबंधित उच्च विभाग को मजदूरों परेशानी लिख कर भेज दी और ठेकेदारों को नोटिस जारी करके बोला गया कि जल्द ही मजदूरों की परेशानी हल करे अन्यथा वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।
ललित प्रकाश तिर्की, प्रबंधन अधिकारी वेस्टर्न कोल फील्ड लिमिटेड, पाथाखेड़ा

