बकलोल क्या है: पत्रकारिता के आड़ में अपने आप को मंदबुद्धि, बुद्धिहीन, गवार, बेवकूफ, नासमझ, चुतिया, बेअकल, आदि शब्दों से कहना ही बकलोल हैं- नामदेव
बैतुल। कुछ नासमझ लोग अपने आप को समझदार लोगों की श्रेणी में खड़ा कर बकलोल बोलकर कुछ भी परिभाषित कर रहे हैं वे यह नहीं...
