CM हेल्पलाइन शिकायतों में लापरवाही पड़ी भारी, कलेक्टर बोले- कोताही बर्दाश्त नहीं

बैतूल/सारणी। महिला एवं बाल विकास परियोजना सारनी में लगातार मिल रही लापरवाही की शिकायतों पर आखिरकार बड़ा प्रशासनिक एक्शन हुआ है। कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रभारी सीडीपीओ संगीता धुर्वे को निलंबित कर दिया है।
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गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित सीएम हेल्पलाइन की विभागवार समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने लंबित शिकायतों की विस्तार से समीक्षा की। सहकारिता, कृषि, वन, जल संसाधन, श्रम, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, राजस्व, लोक निर्माण और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग सहित विभिन्न विभागों की प्रगति पर नाराजगी जताई गई।
लाड़ली लक्ष्मी योजना की शिकायतें लंबित रखने पर कार्रवाई
समीक्षा के दौरान लाड़ली लक्ष्मी योजना की छात्रवृत्ति से जुड़ी शिकायतों को अनावश्यक रूप से लंबित रखने और निराकरण में लापरवाही पाए जाने पर सारनी की प्रभारी सीडीपीओ संगीता धुर्वे को निलंबित करने की कार्रवाई की गई। वहीं प्रभारी सीडीपीओ मुलताई का वेतन काटने के निर्देश भी दिए गए।
अन्य अधिकारियों पर भी गिरी गाज
बैठक में शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान सेवा निवृत्त कर्मचारियों के जीपीएफ प्रकरण लंबित पाए जाने पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी बैतूल का सात दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए गए।
बैठक में अनुपस्थित रहने और शिकायतों के निराकरण में कम प्रगति पर जनपद पंचायत चिचोली की मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रतिभा जैन का वेतन काटने के निर्देश भी कलेक्टर ने दिए।
कलेक्टर सूर्यवंशी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 50 दिन से अधिक लंबित शिकायतों का तत्काल निराकरण किया जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में अपर कलेक्टर वंदना जाट सहित सभी जिला अधिकारी उपस्थित रहे।
सारनी परियोजना पर पहले से उठ रहे थे सवाल
सूत्रों के अनुसार, महिला एवं बाल विकास परियोजना सारनी में लंबे समय से अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही थीं। विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर जिले सहित प्रदेश स्तर पर भी आलोचना हो रही थी। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया।
कार्यक्रम में विवादित बयान भी चर्चा में
जानकारी के अनुसार, एक स्थानीय कार्यक्रम में संगीता धुर्वे द्वारा बच्चों को संबोधित करते समय दूध में आयरन होने संबंधी टिप्पणी भी चर्चा का विषय बनी थी। इसके अलावा कार्यकर्ता भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता और अवैध वसूली के आरोप भी लगाए गए हैं।
वार्ड क्रमांक एक में समूह के माध्यम से बच्चों को दिए गए भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी शिकायतें सामने आई थीं, जिसमें घटिया भोजन परोसे जाने और बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ के आरोप लगे थे।

