सारनी में दिखी गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी मिसाल
बैतूल/सारनी। नगर पालिका परिषद सारनी और इसके अंतर्गत आने वाले बगडोना, शोभापुर कॉलोनी और पाथाखेड़ा क्षेत्रों में ईद-उल-फितर (मीठी ईद) का मुकद्दस पर्व पूरी धार्मिक अकीदत, हर्षोल्लास और आपसी भाईचारे के साथ मनाया गया। रमजान के एक महीने के कठोर रोजे और इबादत के बाद, मुस्लिम समाज के लोगों ने सुबह मस्जिदों और ईदगाहों में पहुंचकर खुदा की बारगाह में सजदा किया और देश-दुनिया में अमन, चैन और तरक्की की दुआएं मांगीं।
अमन और शांति की दुआओं के साथ अदा की गई नमाज़
सारनी स्थित मुख्य जामा मस्जिद में इमाम निसार अहमद साहब ने अकीदतमंदों को ईद-उल-फितर की विशेष नमाज़ अदा कराई। नमाज़ मुकम्मल होने के बाद मुल्क में शांति और सलामती की विशेष दुआएं मांगी गईं। इसके बाद सभी ने गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाया और ‘ईद मुबारक’ कहते हुए दिली मुबारकबाद पेश की। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर किसी के चेहरे पर ईद की खास चमक और खुशी देखते ही बनती थी।
जकात और फितरा: जरूरतमंदों के चेहरों पर भी लौटी मुस्कान
त्योहार का असली मकसद हर तबके को खुशियों में शामिल करना है। अंजुमन कमेटी जामा मस्जिद के अध्यक्ष रफी अहमद और सचिव अब्दुल रहमान खान ने इस मौके पर बताया कि रमजान के पूरे महीने इबादत और रोज़ा रखने के बाद ईद के दिन अल्लाह का शुक्र अदा किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस दौरान ‘जकात’ और ‘फितरा’ के रूप में अपनी कमाई का एक हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों में बांटा जाता है, ताकि समाज का हर व्यक्ति ईद की खुशियों में शरीक हो सके और कोई भी इस मुकद्दस दिन मायूस न रहे।
प्रशासन रहा पूरी तरह मुस्तैद
त्योहार के मद्देनजर और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग भी पूरी तरह से मुस्तैद नजर आया। एसडीओपी प्रियंका करचाम, थाना प्रभारी जयपाल इवनाती, नायब तहसीलदार संतोष पथोंरिया इन सभी अधिकारियों ने स्वयं मैदान में उतरकर सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया और शांतिपूर्ण तरीके से नमाज संपन्न कराई।
सांप्रदायिक सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब की शानदार झलक
इस बार सारनी क्षेत्र में ईद के मौके पर सांप्रदायिक सौहार्द की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली। हिंदू समाज के लोगों ने भी अपने मुस्लिम भाइयों के गले मिलकर उन्हें ईद की बधाइयां दीं। कई स्थानों पर हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों के लोगों ने एक-दूसरे के घर जाकर मीठी सेवइयों और मिठाइयों का आनंद लिया। यह नजारा क्षेत्र की उस पुरानी ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ का जीवंत उदाहरण बना, जहां त्योहार दूरियां मिटाने और दिलों को जोड़ने का काम करते हैं।
सारनी में मनाई गई इस ईद ने समाज को यह कड़ा संदेश दिया है कि त्योहार केवल खुशियां मनाने का ही नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग में प्रेम, एकता और भाईचारे की जड़ों को और अधिक मजबूत करने का एक सशक्त माध्यम हैं।

