कमीशन में किताब बेचने वाले दुकानदार भी जांच के दायरे में
बैतूल/सारनी। शहर के सेंट फ्रांसिस स्कूल में सिलेबस, किताबों और यूनिफॉर्म में लगातार बदलाव कर अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डालने के आरोपों के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच टीम गठित कर दी है।
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महंगी किताबों का खेल, अभिभावकों पर बढ़ता बोझ
अभिभावकों का कहना है कि स्कूल प्रबंधन NCERT की जगह हर साल निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें लागू कर रहा है, जिससे पुरानी किताबें बेकार हो जाती हैं और उन्हें मजबूरन नई किताबें खरीदनी पड़ती हैं। इसके साथ ही यूनिफॉर्म में बार-बार बदलाव कर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।

मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार, स्कूल बिना पूर्व अनुमति और सूचना के बार-बार सिलेबस और यूनिफॉर्म में बदलाव नहीं कर सकते। एक बार तय की गई यूनिफॉर्म कम से कम तीन शैक्षणिक सत्रों तक लागू रहनी चाहिए।
कमीशनखोरी पर भी जांच, दुकानदारों की भूमिका संदिग्ध
मामले में कमीशनखोरी के आरोप भी सामने आए हैं। शिकायत है कि कुछ दुकानदारों के साथ मिलकर महंगी किताबें बेचने का खेल चल रहा है। जांच टीम अब ऐसे दुकानदारों की भूमिका की भी पड़ताल करेगी और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा, फीस में पारदर्शिता न रखने और मनमानी बढ़ोतरी के आरोप भी स्कूल पर लगे हैं। नियमों के तहत स्कूलों को हर साल फीस संरचना की जानकारी शिक्षा विभाग को देना अनिवार्य होता है।
इस पूरे मामले ने शिक्षा के बाजारीकरण पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और संभावित कार्रवाई पर टिकी है।

